रामायण डायलॉग Ramayan Dialogue Status Part 1

Ramayan Dialogue Status

Ramayan Dialogue Status


संसार में बहुत सी अनहोनी बातें ऐसी होती हैं जो मनुष्य के समझ में नहीं आती.

अकस्मात एक दिन कोई भूकम्प आता है जो मनुष्य के जीवन को उथल पुथल कर देता है. ऐसे समय किसी दुसरे को दोष नहीं देना चाहिए. उसे दैव वश मान कर अपना प्रारब्ध मान कर स्वीकार कर लेना चाहिए.

आज जो हो रहा है वो होनी करा रही है, ये विधना है जिसने माता कैकयी जैसी स्नेहमयी और पुण्यशिल स्त्री को ऐसी बुद्धि दे दी है.

कभी-कभी आँखों से देखा हुआ भी सत्य नहीं होता.

राजपथ का परमार्द साधारण मानव को हो सकता है. इंद्र जैसे देवता को भी हो सकता है. परन्तु भारत का स्थान देवताओं से भी ऊँचा है.
Ramayan Dialogue Status



वो एक महामानव के रूप में महानता की परी सीमा है. जिस प्रकार खटाई की एक बूंद से क्षीर सागर का दूध नहीं फट सकता. उसी प्रकार अयोध्या तो क्या त्रिलोक का राज्य भी भरत को दे दिया जाय तो भी उसे राजमध नहीं हो सकता.

माता! मैं तो केवल इतना ही जनता हूँ की भगवान के निकट जाती, पाती, ज्ञान, धर्म, कुल, गुण और चतुराई का कोई मोल नहीं होता. वो तो केवल भक्ति के नाते को ही सच्चा नाता मानते हैं.

मईया! अपने पुत्र से ममता का मोल माँगने आयी हैं.

माता! यदि आपकी ममता का यही मोल है की मैं जिसे धर्म मानता हूँ उसका त्याग कर दूँ. आप जिस रघुकुल की शोभा हैं उसकी कीर्ति में पिता का वचन भंग करके कलंक लगा दूँ. तो कहिये.. मुझे आपके चरणों की सौगंध है मैं इसी समय अयोध्या लौट जाऊंगा. परन्तु फिर मेरा जीवन रण से भागे किसी कायर की भांति एक तिरस्कार पूर्ण अस्तित्व एक श्राप बनकर रह जायेगा.

पिता और पुत्र का नाता प्रजा के मतामत से निर्धारित नहीं होता, इसी प्रकार भाई और भाई के बीच फैसले तलवार से नहीं किए जातें.

Ramayan Dialogue Status in English

There are many untoward things in the world which are not understood by human beings.

Suddenly one day there is an earthquake which makes the life of a human in turmoil. No one should be blamed at such a time. Considering it as a divine condition, it should be accepted as your destiny.

What is happening today is making it happen, it is the law which has given such wisdom to a loving and virtuous woman like Mata Kaikeyi.

Sometimes the truth is not even seen with the eyes.

The glory of Rajpath can be for ordinary human beings. It can happen to a deity like Indra too. But India's place is higher than the gods

That is the limit of greatness as a great human being. Just as the milk of the Kshir Sagar cannot burst with a single drop of sour cream. In the same way, even if Ayodhya, the kingdom of Trilok is given to Bharata, he cannot be a royal.

Mother! I only know that there is no value of going near God, attainment, knowledge, religion, family, virtue and cleverness. They consider only the relationship of devotion as a true relationship.

Maya! She has come to ask for the value of Mamta from her son.

Mother! If this is the value of your love, I should give up what I believe in religion. In the fame of the Raghukul that you are adorning, by breaking the word of the father, let me tarnish it. So say.. I have the blessing of your feet, I will return to Ayodhya at this time. But then my life, like a coward who ran away from battle, a contemptuous existence would remain as a curse.

The relation of father and son is not determined by the opinion of the subjects, similarly the decisions between brother and brother are not made by the sword.